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रवीश का लेख: जेल की दीवार,पार्क और सीवर के जीर्णोद्धार का लोकार्पण करने बनारस गए थे प्रधानमंत्री मोदी Leave a comment

प्रधानमंत्री बनारस गए थे। दूसरी लहर में नरसंहार के बाद उनके बयानों से लग रहा था कि अब वे अपने सार्वजनिक और चुनावी कार्यक्रमों को लेकर सचेत हो रहे हैं क्योंकि दूसरों को आए दिन चेतावनी देने लगे थे। प्रधानमंत्री मोदी जिस काम के लिए गए थे वह काम दिल्ली से हो सकता था। कोरोना के कारण यूनिवर्सिटी बंद है लेकिन यूनिवर्सिटी के कैंपस में हज़ारों लोगों को जुटा कर कार्यक्रम किया और भाषण भी दिया गया। इन्हें लाने- ले जाने में कोरोना के व्यवहारों का कितना पालन हुआ होगा बताने की ज़रूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री के बयानों का हवाला देकर यूपी सरकार से सवाल पूछ रहा है कि प्रधानमंत्री कोरोना से सतर्क रहने को कह रहे हैं औऱ यूपी सरकार कांवड़ यात्रा की अनुमति दे रही है। मुमकिन है अदालत अब बनारस की सभा का वीडियो देखेगी जिसमें कई लोग नाम के एक एक खाने में बिठाए गए हैं लेकिन आप देख सकते हैं कि मास्क में नहीं हैं।

अब आते हैं उस कार्यक्रम पर जिसके लिए प्रधानमंत्री बनारस गए थे। इस कार्यक्रम को लेकर यूपी सरकार ने अख़बारों में भरूआ विज्ञापन छपवाए। भरुआ विज्ञापन शब्द भरुआ आचार, भरुआ बैंगन से लिया गया है। मतलब भर पन्ना विज्ञापन। इसमें जिन कार्यों को गिनाया गया है उसे आप देखें और ख़ुद तय करें कि क्या इसके लिए प्रधानमंत्री को बनारस जाने की ज़रूरत थी? इस विज्ञापन में लिखी एक एक बात को पढ़ेंगे तो लगेगा कि प्रधानमंत्री अभी भी जनता को भरमाने की टेक्‍नालजी से बाहर नहीं आ सके हैं। अजीब अजीब तरह के ऐसे काम हैं जिनके उदघाटन के लिए प्रधानमंत्री की ज़रूरत नहीं थी.

कभी आपने सुना है कि जेल की दीवार का उदघाटन या लोकार्पण प्रधानमंत्री करने गए हों? विज्ञापन में लिखा था कि केंद्रीय कारा की मुख्य नयी प्राचीर का लोकापर्ण प्रधानमंत्री करेंगे। प्राचीर में भी अलग वर्गीकरण है। मुख्य नयी प्राचीर का उदघाटन प्रधानमंत्री करेंगे। लगता है केंद्रीय कारागार में कोई अ-मुख्य प्राचीर है जिसका उदघाटन कोई और करेगा। क्या इसका भी उदघाटन अब प्रधानमंत्री करेंगे? जेल की दीवार का लोकार्पण के लिए तो विधायक नहीं जाते होंगे। विज्ञापन में सीवर के जीर्णोद्धार से लेकर शहर में चार पार्कों का भी ज़िक्र था। आम तौर पर ऐसे कार्यक्रम विधायक और पार्षद के हिस्से आते हैं। खुद प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी और यूपी के विकास की लिस्ट बहुत लंबी है। लेकिन अगर आपने विज्ञापनों पर ग़ौर किया होता तो पता चलता कि किस तरह के कामों को जोड़ कर लिस्ट लंबी कई गई है।

क्या आपकी गली की सड़क टूट जाए और उसकी मरम्मत हो तो उसका लोकार्पण होगा और वो प्रधानमंत्री करेंगे? क्या प्रधानंमत्री मोदी अब इस तरह के ज़रूरी काम करने लगे हैं? आज 84 घाटों पर सूचना पट्ट का लोकार्पण हुआ। उसमें घाटों के बारे में पांच दस पंक्तियों में विवरण है। इसका बजट पांच करोड़ बताया गया है। सोचिए। यही नहीं बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के लिए अस्सी फ्लैट बने हैं उसका लोकार्पण प्रधानमंत्री ने किया है। फिर वाइस चांसलर क्या करेंगे? वे फ्लैट के गेट में कॉल बेल लगाने की योजना का उद्घाटन कर सकते हैं। अजीब फुर्सत में यह देश चला गया है। यही नहीं यूपी सरकार के विज्ञापनों में इन सबको परियोजना बताया गया है। क्या बनारस के लोगों ने हमेशा के लिए सोचना बंद कर दिया है? क्या सीवर निर्माण और जेल की दीवार का बनना परियोजना है?

इसी पर मैंने अंग्रेज़ी में एक टीका लिखी है। बताने का प्रयास किया है कि मरम्मत का काम परियोजना नहीं है। मरम्मत, जीर्णोद्धार, योजना और परियोजना अलग-अलग चीज़ें हैं।मैंने अंग्रेज़ी में ये कहा है-

“In simple english, the anchor wants to highlight the contradictions between the scale of work, the division of work and the words used for those works. Different works should be defined by different sets of words. One should not use one word to define all kinds of works. I am sure the honourable PM would agree with me in case the honourable CM chooses to disagree with me.”

सात साल तक लोकप्रियता के शिखर पर रहने और तमाम चुनावी जीत के बाद प्रधानमंत्री पार्क और दीवार का लोकार्पण कर रहे हैं। इसका मतलब है कि देश वाकई तरक्की कर गया है। पार्षद के हिस्से के काम का लोकार्पण प्रधानमंत्री कर रहे हैं। देखा जाए तो प्रमोशन पार्षद का हो गया है।

प्रधानमंत्री ने आज एक बड़ा काम किया है। कहा है कि कोरोना के संकट में यूपी सरकार ने अभूतपूर्व काम किया है। यूपी के उन लोगों को ख़ुद से माफ़ी मांगनी चाहिए जिनके अपने तड़पा तड़पा कर मार दिए गए और जब मारे जा रहे थे तब आम लोगों के अलावा कोई काम नहीं आ रहा था।

नोट: बाक़ी आप उसी रास्ते पर चलें जिस पर आई टी सेल ले जा रहे हैं। सत्यानाश अब आने ही वाला है। विकास जैसे आया था।

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